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फ्रंटलाइन योद्धा,कोरोना वारियर्स के जुबानी सम्मानों के सहारे करते रहे जोखिम का काम, कोरोना खत्म तो नौकरी ख़त्म, वेतन भी नहीं दिया

ग्वालियर, 16 जून। कोरोना संक्रमण के संकट काल में नौकरी पर रखे गए एक सैकड़ा से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारियों को जयारोग्य चिकित्सालय समूह (JAH) प्रशासन से अचानक नौकरी से निकाल दिया है। अप्रैल में तैनात किए इन कर्मचारियों को 10 जून को बिना कोई पूर्व सूचना दिए कह दिया गया कि उनकी सेवाएं समाप्त हो गई हैं। कर्मचारियों की शिकायत है कि नौकरी पर रखे जाते वक्त ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी उनकी सेवएं महज़ दो महीने के लिए ही हैं। विडंबना है कि इन बेचारों को इन दो माहों का भी वेतन भी अब तक नहीं दिया गया है। गुस्साए कर्मचारियों बुधवार सुबह JAH अधीक्षक के कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया, और गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) के अधिष्ठाता कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों का आरोप है कि उन्होंने हर तरह के जोखिम उठाकर कोरोना की दूसरी लहर के चरम पर संक्रमित मरीजों के बीच रह कर उनकी देखरेख की है। इलाज से लेकर देहांत तक कर्मचारियों ने भीषण गर्मी में 12 घंटे पीपीई किट पहन कर काम किया है, लेकिन कोरोना वायरस का संक्रमण कम होने लगा तो उनकी सेवाए अचानक समाप्त कर दी गईं। इन कर्मचारियों को इंदौर की अपडेटर सर्विसेज के जरिए आउटसोर्स किया गया था। इनमे सफाई कर्मी से लेकर वार्ड बॉय और हाउसकीपिंग कर्मचारी शामिल थे। कुल 124 में से 100 से ज्यादा कर्मचारियों को हटा दिया गया है, इनमें महिला-पुरुष दोनों शामिल हैं। इन्हें मलाल है कि यदि सेवा शर्तों में सिर्फ दो महीने का कार्यकाल स्पष्ट होता तो वह ऐसी जोखिम भरी सेवाएं करते ही नहीं। अन्याय का चरम यह है कि निकाले गए कर्मचारियों को दो माह की सेवाकाल के वेतन का भी भुगतान भी नहीं किया गया है। ज्ञातव्य है कि इनका वेतन 10-12 हजार रुपए प्रति माह नियत किया गया था।

फ्रंटलाइन योद्धा का मिला सम्मान, मंत्री ने 5 हजार अतिरिक्त राशि का किया वादा     

गरीब कर्मचारियों को दुख है कि प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उन्हें फ्रंटलाइन कोरोना योद्धा की जुबानी उपाधियां देते रहे, साथ कोविड-19 प्रभारी मंत्री प्रदुमन तोमर तो इनका का काम देखकर इतने खुश हुए थे कि 5-5 हजार रुपए वेतन से अलग से देने का वादा किया था। जबकि फिलहाल उन्हें अतिरिक्त तो दूर मूल वेतन के भी लाले पड़े हुए हैं, नौकरी से निकाल दिया गया है वह अलग। ज्ञातव्य कि नौकरी से निकाले गए अधिकांश कर्मचारी अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के हैं। विडंबना यह भी है कि इनकी आवाज सुनने और इनके सवालों का जवाब देने अस्पताल प्रशासन का कोई भी अधिकारी तैयार नहीं है। उनके अनुसार कर्मचारियों की मांगों के संबंध में संभागायुक्त को अवगत करा दिया गया है।

gudakesh.tomar@gmail.com

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